Raja ki kahani || राजा की कहानी

Raja ki kahani

Raja ki kahani ||कहानी राजा की

Raja ki kahani :- एक राजा था , उसकी एक रानी थी । दोनों – हँसी – खुशी से रहते थे । बहुतदिनों बाद उन्हें एक बेटा हुआ । बेटा का रंग काला था । रानी बेटे का काला रंग देखकरघबराने लगी । उसे लगा कि राजा जी बेटे का काला रंग देखकर मुझे छोड़ न दें । वह परेशानहोकर अपनी नौकरानी के पास गयी । संयोग से नौकरानी को भी उसी समय एक बेटा हुआ था । नौकरानी के बेटे का रंग गोरा था । रानी ने अपने बेटे से नौकरानी का बेटा बदल दिया ।

राजा की कहानी ||Raja ki kahani

नौकरानी का पति रजाई बनाता । | था । धीरे – धीरे दोनों बच्चे बड़े होने लगे । जब वेशिक्षा ग्रहण करने के योग्य हुए तब राजा ने दोनों की शिक्षा प्रारंभ की । जो गोरा बच्चा थावह अपने पिता की तरह हर चीज रूई समझकर फाड़ या तोड़ देता था । पर जो राजा काबेटा था वह पढ़ने में बहुत तेज था । तब राजा को | उस काले बच्चे की पढ़ाई – लिखाईबोल – चाल देखकर लगा कि काश यह मेरा बेटा होता ।

Raja ki kahani
Raja ki kahani

राजा की मनः स्थिति को देखकर रानी को सन्तुष्टि हुई क्योंकि वह चाहती थी कि राजा उस बच्चे को अपना लें । फिर समय पाकर रानी ने राजा को बताया कि वही काला बच्चा हमारा बेटा है । राजा को भी उसे अपने बेटे के रूप में पाकर बड़ी खुशी मिली । अब रानी का डर समाप्त होगया था । फिर वे सब हँसी – खुशी से रहने लगे । शिक्षा – पूजा रूप की नहीं गुण की होती है ।…..

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