motivational hindi kahani

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motivational hindi kahani :- एक बुढ़िया सड़क पर सुई खोज रही थी । कुछ बच्चे आये और पूछा – ‘ दादी ! सुई कहाँगुम हुई थी ? ‘ बुढ़िया ने कहा – ‘ कमरे में गुम हुई थी । बच्चे बोले – ‘ दादी ! यह क्या ?सुई कमरे में गिरी और उसे तुम खोज रही हो सड़क पर । वह कैसे मिलेगी भला ?’ बुढ़िया बोली – ‘ बेटा , क्या करूँ । कमरे में अंधेरा है । प्रकाश केवल सड़क पर ही है । प्रकाश में ही तो ढूंढ रही हूँ | हमारे जीवन में ऐसे विरोधाभास चलते रहते हैं । हमदूसरों के विरोधाभास पर हँसते हैं । उनकी मूर्खता का उपहास करते हैं , किंतु हम स्वयंअपने जीवन में न जाने कितने विरोधाभासों को पालते चले जाते हैं । सुख का निझेर भीतर है और हम बाहर खोज रहे हैं ।

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साधना इस भ्राति को चूर – चूर कर देती है । वह सुख को खोजने के लिए भीतर में प्रवेशकरने की ओर प्रेरित करती है और आवश्यकता की पूर्ति के लिए पदार्थ को उपेक्षित बताती है ।पदार्थ सुख नहीं देते , वे आवश्यकता की पूर्ति मात्र करते हैं । दो खोजे हैं । एक है आवश्यकतापूर्ति की खोज और दूसरी है _ _ _ सुख की खोज । आवश्यकता की पूर्ति पदार्थ से ही संभवहै , अध्यात्म से वह नहीं हो सकती । जबकि सुख की उपलब्धि केवल अध्यात्म से ही संभव है ,पदार्थ से नहीं हो सकती । पदार्थ का क्षेत्र आवश्यकता की पूर्ति का क्षेत्र है । अध्यात्म का क्षेत्रइससे बिल्कुल उल्टा है । वह है सुख – पूर्ति का क्षेत्र ।


Karan ki kahani

रामू नाम का एक व्यक्ति था । वह अपनी पत्नी एवं एक बेटा करन के साथ रहता था । ये लोग बहुत गरीब थे । उसके पिताजी करन को पढ़ाने के लिए मेहनत करके उसे स्कूल भेजनेलगे । करन जब नौ साल का था तो उसकी माँ की मृत्यु हो गई थी । अब उन्हें बहुत कष्ट होने लगा । पिताजी को इधर घर की समस्या और उधर काम की समस्या थी । करन के घर पर न दूरदर्शन था और न ही पंखा था । करन को पढ़ाई में ज्यादा मन नहीं । लगता था । फिर भी पिताजी के डर से वह पढ़ता था । एक दिन वह अपने दोस्त के घरगया उसने वहाँ दूरदर्शन पर नृत्य करते हुए एक लड़के को देखा उसकी रुचि जग गई । फिर वह घर पर आ कर वही नृत्य करने लगा ।

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इसी तरह वह रोज नए – नए नृत्य करने लगा । उसके पिताजी ने देखा की वह पढ़ाई में मननहीं लगा रहा है । तो उन्होंने एक दिन करन को बहुत जोर से डांटा और कहा कि तुम्हें पढ़ानेके लिए मैं कितनी मेहनत कर रहा हूँ , कहाँ – कहाँ से । पैसे ला रहा हूँ , ताकि तुम पढ़ के कुछ बनोगे । मेरा सर गर्व से ऊँचा करोगे लेकिन पढ़ाई में तेरा मन है ही नहीं। करन ने कहा मैं पढ़ना नहीं चाहता हूँ । मैं नृत्य ।में ही आगे कुछ करना चाहता हूँ । पिताजीने कहा कि नृत्य में कुछ नहीं हो सकता है । नाही तर पैसा कमाओगे और ना ही नाम ।सुन लो आज के बाद नृत्य का नाम लिया तो मुझसे बुरा कोई होगा । तुम्हें सिर्फ पढ़ाई करनी है ।

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तुम्हें सिर्फ पढ़ाई करनी है । उस दिन कर ने कुछ सोचकर संकल्प किया कि मैं जितना हो सकेपदूंगा लेकिन नृत्य करना नहीं छोडूंगा । वह रोज नृत्य का अभ्यास करता । उसे कोई सिखानेवाला नहीं था । फिर भी वह स्वयं मेहनत करता था । जब उसके पिताजी घर पर नहीं रहते थेतब वह पूरी जी जान लगा कर मेहनत करता था । करन अब बड़ा हो चुका था और वह बहुत ही अच्छा नृत्य करना सीख गया था । एक दिन करन के दोस्तों ने कहा की नृत्य की प्रतियोगिताहोने वाली है । तुम जाओ तुम अवश्य जीतोगे । उसके पास चुनाव में जाने के लिए पैसे नहीं थे । वह अपने पिताजी से पैसे मांगने से डर रहा था , लेकिन फिर भी उसने मांगा ।

उसके पिताजी ने पूछा कि तुम्हें पैसे किसलिए चाहिए तो करन ने कहा कि मुझे एक नृत्य के चुनावमें जाना है । उसका पिताजी ने कहा अभी तक तुम्हारा नृत्य का भूत दिमाग से उतरा नहीं है ।मैंने तुम्हें समझया था और आज भी समझाता हूँ नृत्य में कुछ नहीं मिलता ना पैसा और न ही सम्मान । करन ने अपने पिताजी को बहुत समझाया लेकिन उसके पिताजी ने कहा कि मैं इतनी मेहनत से पैसे कमाता हूँ और मुझे ही पता है पैसा हमारे जीवन में कितना जरूरी है । करन ने फिर सोचा कि मैं अवश्य जाऊँगा अपने पिताजी को मनाऊँगा ।

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पिताजी से मंजूरी मिल गयी और इतना ही नहीं वह बाद में पूरे देश में नृत्य में मशहूर हो गया । जब करन अपने घर लौट रहा था तब उसे उस समय उसके पिताजी मिले तभी उधर से कुछलोग आते हैं और कहते हैं कि ये तो वही है न जो नृत्य करके जीता है । क्या ये उसके पिता हैं । कितना भाग्यशाली है । इन्हें इतना समझदार बेटा मिला है । इनका सर तो गर्वसे ऊँचा उठ गया । वे दोनों घर आए ।

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फिर करन ने कहा कि पिताजी ये जीत अपनी मेहनत की कमाई है । यह कहकर वह पैसा अपनेपिताजी के हाथ पर रख देता है । वो रोते हुए हाथ जोड़कर कहने लगे कि बेटा मुझे माफ करदेना । मैंने तुम्हें नृत्य के लिए कभी भी प्रोत्साहित नहीं किया । मुझे माफ कर दो । तुमने पढ़ाई भी बहुत की है । फिर वे खुशी – खुशी रहने लगे । शिक्षा : – बच्चों को पढ़ाई – लिखाई करना आवश्यक है , किन्तु बच्चों की इच्छा क्या है ? उनकी रुचि किस चीज में है । उन पर विशेष ध्यान देना चाहिए । इससे आप भी खुश रहेंगे और बच्चे भी ।


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