मजेदार हिन्दी कहानी || मौन का मूल्य /maun ka mooly

मजेदार हिन्दी कहानी || मौन का मूल्य 

मंगापुरम का जमींदार बहुत वाचाल और बहुत | गुस्से वाला था । गाँव में कोई भी उसे कोई बात समझाने कासाहस नहीं कर पाता था । एक दिन जमींदार अकेला ही टहलने के लिए निकला । गाँव के छोर पर एकसुन्दर पहाड़ था । उसकी पहाड़ पर चढ़ने की इच्छा हुई । लेकिन , अकेले ऊपर जाने में उसे थोड़ी हिचक हुई ।वह रुक कर सोचने लगा । पहाड़पर घना जंगल था और जमींदार भालुओं से बहुत डरता था । वह वहाँ मौजूद एक गड़ेरियेके साथ ऊपर चढ़ने लगा । गड़ेरिया चुपचाप तेज कदमों के साथ चढ़ रहा था , इसलिए वह कुछ आगे निकल गया ।मजेदार हिन्दी कहानी || मौन का मूल्य

जमींदार बात करता हुआ चढ़ता रहा । थोड़ी ही देर में वह पिछड़ गया और थक कर एक विशालशिला पर बैठ गया ।गड़ेरिया , जो भोलाभाला था , एकदम बोल उठा , ” अजी मौन धारण करने पर आदमी बिनाथकावट के पहाड़ चढ़ सकता है ।” जमींदार समझ गया कि न केवल पहाड़ चढ़ने के लिए , बल्कि अपनीजिंदगी गुजारने के लिए भी आदमी को ज्यादा बकवासनहीं करनीचाहिए । अब वह मौन का मूल्य समझ गया औरबकवास करना भी बंद कर दिया ।

सरदार भगत सिंह

सरदार भगत सिंह का जन्म वीर प्रसविनि भूमि पंजाब में हुआ था । उनकी शिक्षा लाहौर में हुई ।सन् 1921में असहयोग आंदोलन चला तो उन्होंने लाला लाजपत राय के नेशनल कॉलेज में प्रवेश ले लिया । वहाँ उनकापरिचय भगवतीचरण एवं सुखदेव सरीखे क्रांतिकारी विचारधारा के नव युवकों से हुआ ।

वे एक अच्छे पत्रकार और संपादक थे । जब वे कानपुर में श्रीगणेश शंकर विद्यार्थी के पत्र‘ प्रताप ‘ मेंकाम कर रहे थे तो उनका परिचय चंद्रशेखर आजाद और बटकेश्वर दत्तके साथ हुआ । 8 अप्रैल 1929को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने ( पब्लिक सेफ्टी बिल ) के विरोध में असेम्बली में बम फेंका और पर्चे बाँटे दोनों वहीं पकड़े गए और 23 मार्च 1931को ब्रिटिश सरकार ने भगत सिंह , सुखदेव और राजगुरु कोफाँसी । के फंदे पर चढ़ा दिया ।सरदार भगत सिंह ने गीतापाठ करते । हुए फाँसी का फंदा हँसते – हँसते । स्वयं अपने गलेमें डाल दिया ।

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