जिंदगी भी है आइना।

जिंदगी भी है आइना।

एक गुरुकुल में दो राजकुमार पढ़ते थे । एक दिन आचार्य उन्हें उद्यान में घुमाने ले गए । तभी आचार्य की नजर आम के एक पेड़ पर पड़ी । एक बालक आया और पेड़ के तने पर डंडा मारकर फल तोड़ने लगा । आचार्य ने राजकुमारों से पूछा , इस दृश्य के बारे में तुम दोनों की क्या राय है ?

जिंदगी भी है आइना।

पहले राजकुमार ने कहा , ‘ गुरुदेव , वृक्ष भी बगैर डंडा खाए फल नहीं देता । यानी लोगों से दबाव डालकर ही कोई काम निकाला जा सकता है । दूसरा राजकुमार बोला , गुरूजी , मुझे लगता है कि जिस प्रकार यह पेड़ डंडे खाकर भी मधुर आम दे रहा है । उसी प्रकार व्यक्ति स्वयं दुःख सहकर भी दूसरों को सुख दे सकता है । अपमान के बदले उपकार कर सकता है ।

गुरुदेव मुस्कुराए और बोले , ‘ देखो , जीवन में दृष्टि ही महत्त्वपूर्ण है । एक घटना पर तुम दोनों की राय अलग है , क्योंकि तुम्हारी दृष्टि में भिन्नता है । मनुष्य अपनी दृष्टि के अनुसार ही जीवन की व्याख्या करता है , उसी के अनुरूप कार्य करता है , और उसी के मुताबिक फल भी भोगता है । ‘ सच भी है कि जब तक हम अपना दृष्टिकोण सकारात्मक नहीं रखेंगे तब तक सही दिशा में आगे नहीं बढ़ पाएँगे ।


जिज्ञासु

एक गाँव था जहाँ एक छोटा सा बचा था । वह बहुत जिज्ञासु था । हमेशा अपने माता – पिता से बरा अनेक प्रशन पूछता था । पर उसके माता – पिता गरीब । तथा अनपढ़ थे । एक दिन उस बच्चे ने अपनी माता से पूछा कि माँ हवा क्यों चलती है । पर उसकी माता को इस प्रशन का उत्तर नहीं आता था । उसके पिता ने अपने । बच्चे की जिज्ञासा को देखकर उसे स्कूल में डाल दिया । उसने स्कूल जाते ही अपने मास्टर जी से पूछा कि ‘ हम पढ़ते क्यों हैं मास्टर जी ने कहा , हम अपनी बुद्धि बढ़ाने के लिए , अपनी समझ शक्ति बढ़ाने के लिए पढाई करते हैं ।

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वह बच्चा बहुत खुश होकर अपने घर जाकर अपने माता – पिता को आकर कहने लगा । माँ ! माँ ! मास्टर जी ने मुझे एक प्रशन का उत्तर दिया , अब उसके माता – पिता को लगा कि ना से बच्चे की जिज्ञासा खत्म हो गई है । पर ऐसा नही था । वह दूसरे दिन स्कूल गया । फिर उसने प्रशन पूछा कि तुम्हारे प्रशन पूछने की जिज्ञासा कहाँ से उत्पन्न हुई ? यह उत्तर उस बच्चे को नहीं पता था , पर मास्ट जी ने कहा , तुम्हारी जिज्ञासा भी सही है । परन्तु , जिज्ञासा का समाधान ढूँढने में भी हमे कोशिश करनी चाहिए , समाधा नहीं मिलने पर मास्टर जी से पूछना चाहिए । बच्चा समझ गया तथा उस कोशिश करनी शुरु कर दी । अब उस जिज्ञासा और लगी ! सत्य है जिन ढूंढा पाईयाँ , अतः जिज्ञासा की अति नहीं करनी चाहिए ।

पहेलियाँ

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