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New hindi story :- एक बार परमात्मा के दरबार में एक अमेरिकन , एकअंग्रेज , एक अरबियन और एक भारतीय पहुँचा । परमात्मा के द्वार पर ये सभी इंतजार कर रहेथे । परमात्माने अमेरिकन को बुलाया । उसके प्रवेश के साथ ही परमात्मा सिंहासन से उठकरउससे प्रेमपूर्ण हाल चाल पूछे । अमेरिकन को अपने सामने वाली कुर्सी पर बिठाया ।अमेरिकन अपना सुख – दुःख बताया और पुनः उसे विदा कर अंग्रेजको बुलाया । अंग्रेज केआने | पर भी उसका स्वागत कर सुख – दुःख पूछ कर विदा किया । फिर अरबियन की बारीआयी – उसके साथ भी । उन्होंने उन लोगों के जैसा ही स्वागत – सत्कार किया ।

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अंत में उन्होंने भारतीय को बुलाया । भारतीय के जाने पर उन्होंने सिंहासन | नहीं छोड़ा । बैठे – बैठे ही उससे सामने वाली कुर्सी पर बैठने को कहा । | भारतीय दुःखी मन से कहा’ प्रभु ‘ धरती पर भी तो भारतीय लोगों के साथ ही भेदभाव हो | रहा है । सनातनधर्मावलंबियों के साथ भेदभाव वहाँ भी और आपके दरबार में भी यह भेदभाव ? सबके आने पर आपने उठकर उनका स्वागत किया – हाथ मिलाया और बिठाया । मैं सनातनधर्मीभारतीय जब आपके कक्ष में आया तो आप भी मेरी उपेक्षा करते हो ‘ प्रभु ‘ । । यह कह भारतीय के आँखों से अश्रुधार बहने लगे । प्रभु इस पर खिलखिला कर हँस पड़े । उन्होंने कहा , | मेरे गददी को खतरा न अमेरिकन से है , न अरबियन से ।

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मेरी गद्दी को खतरा भारतीय से है । मेरी गद्दी पर बैठने की पात्रता केवल भारतीय में है ।इसलिए मैं उठकर खड़ा होने से डर रहा हूँ , क्योंकि भारतीयों का हृदय इतना पावन , प्रेममयीऔर सच्चे धर्म से इतना आप्लावित है कि वह मेरी गद्दी पर बैठने का | हकदार बन गया है ।और सुनो उससे मैं अतिथियों की तरह प्रेम से मिला और उसका स्वागत किया और विदा किया। परन्तु तुम तो मेरे अपने हो , मेरे प्राण , मेरी आत्मा हो । मैं तुम्हें विदा करने वाला | नहीं ।आओ मेरे समकक्ष मेरे बगल में विराजित हो ।

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भारतीय भगवान के इस प्रेम को पाकर भाव – विह्वल हो गया । उसने कहा ‘ प्रभु ‘ आपकेसमकक्ष सिंहासन की हमें चाहत नहीं , मैं तो बस आपके चरणों का दास बनना चाहता हूँ । बसमुझे तो आपके प्रेम की चाहत है । आपकी बनायी गयी सृष्टि के सभी जीव के साथ प्रेमपूर्ण रहकर प्रेम से परिपूर्ण धरा का निर्माण कर सकें यही चाहता हूँ । बस मुझे | आपका स्नेह औरआशीर्वाद चाहिए प्रभु । अपने भक्त को प्रभु उठकर हृदय से लगा लिये । सचमुच हमारा भारतविश्व में अनूठा है । यह संसार तभी तक है जबतक भारत में सनातन धर्म और अध्यात्म जीवितहै । आज भी विश्व को भारत की जरूरत है । जरूरत है केवल हम भारतीयों को अपनास्वाभिमान जगाने की ।

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